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श्री अजय विश्नोई जी का जन्म 14 जून, 1952 को जबलपुर मध्य प्रदेश में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा सागर और जबलपुर में हुई। श्री अजय विश्नोई वेटनरी में स्नातक (पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविधालय, जबलपुर) हैं। उनके पिता का नाम स्व. श्री गौरी शंकर विश्नोई था एवं माता जी का नाम श्रीमती शकुंतला विश्नोई है। श्री विश्नोई जी 6 दिसम्बर 1982 को श्रीमती अलका विश्नोई से विवाह बंधन में बंधे। उनके एक पुत्री और दो पुत्र हैं। इनके परिवार कि विरासत है कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सब एक दुसरे के साथ हैं और परिवार एक है। श्री अजय विश्नोई जी राजनीति में सक्रीय रहते हुए भी भरपूर समय अपने परिवार के साथ बिताते हैं।

श्री अजय विश्नोई जी का शिक्षा काल, काटों भरा रहा, श्री अजय विश्नोई जी अपने कॉलेज के प्रारंभिक जीवन में बहुत उत्सुक, ऊर्जावान और जागरूक युवा रहे हैं। आज भी उनका जीवन समान उर्जा से भरा हुआ है वे अपने कर्तव्यों के प्रति आज भी उतने ही जागरूक हैं। विश्नोई जी कि रूचि पहले राजनीति में नहीं थी, उनका ध्येय कभी भी विधायक या मंत्री बनना नहीं था, किन्तु राजनीति में आकर जन सेवा करना उनके लिए लिखा था।
अजय विश्नोई जी का राजनैतिक क्षेत्र में 40 वर्षों का लंबा संघर्षपूर्ण इतिहास है। उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के भ्रष्ट कुलपति डॉ चंद्रिका ठाकुर को हटाने, प्रदेश व्यापी सफल आंदोलन चलाने से हुईं। और मध्य प्रदेश में उनकी छवि एक छात्र नेता के रूप में बनी।

1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ने के साथ ही, आपातकाल के समय में भी सक्रीय रहे और 25 जून 1975 की रात मीसा में गिरफ़्तारी के साथ इनका आपातकाल का जेल जीवन प्रारम्भ हुआ। 19 माह तक जेल में संघर्ष कर, 29 जनवरी 1977 को जेल से रिहा हुए। जेल जीवन में ही अजय विश्नोई जी संघ और जनसंघ के नेताओं के करीब आये।

इनके जिज्ञासापूर्ण स्वभाव का यह एक उदाहरण है कि इन्होने जेल में ही अंतिम परीक्षा दे कर वेटनरी डॉक्टर की डिग्री पूरी की। अंग्रेज़ी सीखी। योग सीखा।

श्री अजय विश्नोई जी ने 1977 में भय आतंक के वातावरण में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में सक्रीय भूमिका अदा की। विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी सक्रियता से मध्य प्रदेश में पहचान बनायी और फिर सक्रीय रहते हुए अनेक उपलब्धिया प्राप्त की। 1983 में अजय विशनोई मध्य प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा के पहले अध्यक्ष बने। किन्तु 1984 से 1990 तक इन्होने सक्रीय राजनीती से विराम लिया और व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक सफलताएँ प्राप्त की।

1990 में फिर से राजनीति में सक्रिय रूप से सम्मिलित हुए और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री के रूप में सक्रियता से काम किया। 1998 से 2013 तक लगातार 15 वर्ष तक विधायक पद पर रहे।

1998 एवं 2003 में दो बार मंझोली विधानसभा से विधायक बने एवं 2004 में पहली बार मंत्री बने।

2008 में नए बने विधानसभा क्षेत्र पाटन से विधायक और फिर मंत्री बने। विभिन्न् मंत्रालयों में अनेक नवाचार और कीर्तिमान स्थापित किये। मध्य प्रदेश के साथ-साथ जबलपुर को अनेक सौगाते दी।

2004 से 2013 तक मध्य प्रदेश सरकार के विभन्न मंत्रालयों- स्वास्थ्य, चिकत्सा, शिक्षा, PWD, NVDA, नवीन ऊर्जा, पशुपालन, मतस्य पालन, OBC, अल्पसंख्यक कल्याण जैसे विभागों के सफल और सक्रिय मंत्री के रूप में अपनी पहचान बना कर जन सेवा की।