Author Archives: Ajay Vishnoi

Happy Birthday Shri Narendra Damordas Modi

Happy Birthday Shri Narendra Damordas Modi

A Very Happy Birthday to the Honourable Prime Minister of our country, Shri Narendra Damordas Modi. He is the ultimate embodiment of the fact that one can scale great heights in his/her life, regardless of one’s economic and social status. Under the leadership of our Respected PM, India has witnessed a number of significant positive changes in various fields. He has carved a niche for himself as one of the most influential leaders of the world. Despite coming from a humble background, Modi ji went onto achieve great success in his political career, finally being elected as the Prime Minister of India in 2014, holding the highest office of the country. The ‘Swachch Bharat Abhiyan’, initiated under the tutelage of Modi ji, went on to play a significant role in the cleaning up of all the major as well as minor cities across India. Moreover, his government has made it possible to implement laws for or against certain critical yet extremely important issues, issues which affected major groups across the country. The Indian Economy has shown tremendous progress under The Modi Government. While serving as the Chief Minister of Gujarat, he and his government implemented several measures that resulted in Gujarat becoming one of the most prosperous states of the country. He has been successful in replicating the same on a national level. Improved International Relations has been one of the top priorities of Modi ji and his government. Forging new relations and strengthening existing relations with other countries has come a long way in gradually increasing the influence which India exerts on it’s international counterparts. The Modi Government has also been pivotal in combating the widely prevalent issue of corruption and black money. Other policies like- ‘Make in India’ and ‘Digital India’ have proven effective in the upliftment of the general public and helped extend the reach of the internet to a lot of remote and rural places across the nation. Thousands of rural areas across India, which were neglected till date, have been identified, and plans for the electrification and upliftments of these areas are soon to be implemented. Needless to say, Shri Narendra Modi has emerged as one of the most dynamic leaders in the history of our country, and the whole country is hopeful that he will lead this country to new heights.

जब अटल जी और मैने पूरी रात बैठे – बैठे गुजारी

भारतीय राजनीति के अटल अध्याय का अंत हो चुका है। अपने ओजस्वी भाषण के लिए हमेशा याद रखे जाने वाले श्री अटल बिहारी जी वाजपेयी का गुरुवार को निधन हो गया।

भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल जी का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखरपुरुष के रूप में दर्ज है। उनकी पहचान एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक,भाषाविद, कवि, पत्रकार व लेखक के रूप में है। भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता उनसे आत्मीयता के साथ जुडा था। उनके साथ बिताये अनेक संस्मरण याद आ रहे है।

आज आपके साथ एक घटना का जिक्र करना चाहूँगा। जब अटल जी और मैने पूरी रात बैठे – बैठे गुजारी थी। 

बात तकरीबन 25 साल पुरानी है, तब अटल जी की जबलपुर में सभा थी। हुआ कुछ यूँ,  जबलपुर एअरपोर्ट से कार में अटलजी के साथ आना था, तब रास्ते में अटलजी ने कहा, कि आज पूर्णिमा है और भेड़ाघाट का नज़ारा निखर कर दिखेगा। मुझे पूर्णिमा की जानकारी नहीं थी, पता करके उनसे चलने का आग्रह किया पर कहीं भोपाल वाली ट्रेन छूट न जाए ये सोचकर उन्होंने मना कर दिया, पर इस ट्रेन का भेडाघाट स्टेशन पर स्टॉपेज न होते हुए भी अटलजी को आश्वस्त कर लिया कि ट्रेन 2-3 घंटे लेट आएगी हम चल सकते है अटलजी के कवि मन ने पूर्णिमा के चाँद की चाँदनी से नहाये भेड़ाघाट के अद्भुत नज़ारे का दर्शन कर हमारी तारीफ़ की।

 

पर मुसीबत उसके बाद शुरू हुई क्योंकि भेडाघाट स्टेशन पर ट्रेन का स्टॉपेज तो था नहीं, साथ ही देर होने के डर से ओढ़ने का सामान भी नहीं लिया था तब ट्रेन में AC के डब्बे नही होते थे। मुझे अटल जी को साथ लेकर जबलपुर से भोपाल जाना था। प्रथम श्रेणी के डब्बे में एक 2 सीट वाला कूपे बुक था, ऊपर से दिसंबर की ठंड की रात थी।

 

हम नए नए होशियार बने थे। हमें मालूम था कि प्रथम श्रेणी के यात्री को मांगने पर स्टेशन मास्टर द्वारा बिस्तर उपलब्ध कराये जाते है। सो,हमने स्टेशन मास्टर को बोल दिया। जब ट्रेन चली तो अटल जी नीचे वाली और मैं ऊपर वाली सीट पर लेट गए। बिस्तर के नाम पर एक चादर और ओढ़ने को शालनुमा एक लाल कम्बल था। बन्द खिड़की की दरारों से ठंडी हवा बिना रोक टोक के अंदर आ रही थी। ठंड बर्दाश्त  के बाहर थी, लेटना संभव नही हुआ तो मैं शाल ओढ़ कर बैठ गया। नीचे की ओर देखा तो, अटल जी भी शाल लपेटे हुये बैठे है। लचर व्यवस्था के लिए खूब डांट पड़ी, परंतु भोपाल तक का सफर बैठे-बैठे ही पूरा हुआ। उसके बाद कई साल तक जब भी अटलजी सामने पड़ते थे तो उस रात को याद करते थे।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?

हंसते गाते खिलखिलाते अटलजी अब शांत लेटे है। विश्वास नही होता। मन बेचैन है, दिल भारी है, आंखों में आँसू है। उस महान व्यक्तित्व को शब्दों में नही बांध पाऊंगा।

 

आपातकाल – मेरे जीवन का स्वर्णिम काल

Indu Sarkar by Madhur Bhandarkar, The Emergency

इंदु सरकार की पूरी टीम को बधाई। मधुर भंडारकर जी द्वारा बड़े परदे के माध्यम से, आज़ाद भारत के सबसे काले दौर को आज की पीढ़ी तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया है।

 

किन्तु “इंदु सरकार” तो मात्र एक झलक है आपातकाल की, कई कारणों से निर्माताओं के लिए पूरा सच दिखाना संभव भी नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना श्रेष्ठ दिया है।

 

पर गणतंत्र भारत के इस काले दौर को जिन्होंने अनुभव किया, वो ही उसे पूरी तरह समझ सकते हैं, मीसा बंदी के दिनों को मैंने अनेक जेलों में रहकर जिया है, और उन भयावह दिनों के एहसास को बयान कर पाना बहुत मुश्किल है, हालांकि यही दौर मेरे जीवन का स्वर्णिम काल भी रहा, वो कैसे, आइए बताता हूँ…  

 

25 जून 75 की रात पुलिस ने मीटिंग के बहाने बुलाकर 26 जून की सुबह जबलपुर जेल पहुँचा दिया। जबलपुर जेल की विभिन्न बैरेकों से होते हुये टीकमगढ़ जेल (बुंदेलखंड), वापस जबलपुर जेल और अततं: 29 जनवरी 77 को रिहाई के साथ 19 माह 04 दिन की जेल यात्रा का समापन हुआ। 23 वर्ष की उम्र में मिला यह अनुभव, लोकतंत्र के इस काले अध्याय के तमाम कष्टों और यातनाओं के बावजूद  मेरे जीवन का यह स्वर्णिम काल था।

 

कॉलेज जीवन समाप्त नहीं हुआ था। स्नातक की डिग्री हाथ नहीं लगी थी। प्रदेश के एकमात्र कृषि विधयालय का छात्र नेता और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की पृष्ठभूमि में जेलयात्रा प्रारम्भ हो गयी। शुरूआती कुछ दिन लडकोही में गुज़रे। उत्पाती लड़कों के समूह में हम पांच लोगोंं के समूह-को सेनिग्रेशन वार्ड (अब सुभाष चन्द्र बोस वार्ड) से निकाल पांच नं. बैरेक में भेज दिया। मात्र 36 दिनों बाद, 1 अगस्त 75 को हम 8 लोगोंं को टीकमगढ़ जेल (बुंदेलखंड भेज) दिया गया।

 

यहां से मेरा स्वर्णिम काल  प्रारम्भ हुआ। 8 लोगोंं में जनसंघ के कद्दावर नेता श्री बाबुराम पराजम्पे (बाद में सांसद), एडवोकेट श्री निर्मल जैन (बाद में म.प्र. उच्च न्यायलय के महाधिवक्ता, सांसद, राजस्थान के राज्यपाल) शामिल थे। मैं सबसे छोटा था। जनसंघ का इतिहास पर राजनीति का पाठ पढ़ने मुझे किताब की जरुरत नहीं पड़ीचलता फिरता ज्वलंत इतिहास 24 घंटो मेरे साथ था।

 

टीकमगढ़  जेल में हम 8 मिसा बंदियों को मिलने वाली सीमित सुविधाओं में जीवन कष्टप्रद को गया।  न सुबह की चाय का ठिकाना और न ही भरपेट भोजन के व्यवस्था। हमारा संख्या बल सीमित था।

 

दोनों नेताओं की मूक सहमति से जेल के बंदियों को अपने साथ मिलाया। 15 अगस्त 75 बंदियों से जेलर का घेराव करा दिया और 3 घंटो के बाद, जेलर को बंदियों के घेराव से मुक्त करा दिया, जेलर से कैदियों की मांगे पूरी करवा दी और जेलर को एवं जेल प्रशासन को अपनी मुटठी में कर लिया। जेल से सभी सुविधाओं हम मिसा बंदियों को मिलने लगी और जेल के खर्चे पर हम हर सप्ताह 100/- रू. की अपनी आवश्यकता की सामग्री बाजार से बुलवाने लगे। तत्कालीन उप जेलर श्रीवास्तव जो ग्वालियर जेल की अधीक्षक होकर सेवानिवृत्त हो चुके है और ग्वालियर में निवास कार रहे है इस घटनाक्रम के गवाह है।

 

मेरी अंग्रेजी कमज़ोर थी और एडवोकेट निर्मलचंद जैन अंग्रेजी के प्रकांड विद्वान थे। टीकमगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक श्री आर्या के पास अंग्रेजी पुस्तक का भंडार था। गुरु और शिष्य दोनों मिल गये। समय ही समय था। आज मै, जो कुछ अंग्रेजी जनता हूँ इसी स्वर्णिम काल की देन है। बाद में जब मैं, वापस जबलपुर जेल आया तो सेग्रिग्रेशन वार्ड के 100 मीसाबंदी साथियों को अंग्रेजी में लिखे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े राजनैतिक पृष्ठभूमि की किताबों का अध्ययन कर हिन्दी में भाषण देने लगा। नित्य 1 घंटे की क्लास लगने लगी। इस प्रकार इतिहास को जानना, पढना और बोलना सिखा। सेग्रिग्रेशन वार्ड में संघ के प्रचारक डॉ. देशमुख जी से मुलाकात हुयी। डॉ जी से हम लोग न्यू युद्ध सीखने लगे।

 

ज्यादा दिन जबलपुर जेल में नही रुका पाया। मेरे पहुँचने के बाद मुझे मीसाबंदियो की दैनन्दिनी गतिविधियों का सूत्रधार और मुख्य केंद्र मान कर, पहले मुझे अलग करके कोढ़ी बैरक में स्थानांतरित किया गया और 9 दिन बाद जावरा जेल (रतलाम, मध्यभारत) स्थानांतरित कर दिया। इस यात्रा में स्व. श्री विशाल पचौरी जी मेरे साथ थे जो मेरे मित्र बन गये। युवामोर्चा और राजनीति में म्रत्युपरंत तक मेरे साथ रहे। बाद में जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने और जबलपुर को वर्तमान आधुनिक विजयनगर का तोहफा दिया।

 

जावरा जेल में मै, ताले में नही रहता था। स्वतंत्र घूमता था। जावरा जेल में श्री चंद जी मित्तल (अब स्वर्गीय भूतपूर्व नगर निगम महापौर इंदौर नगर निगम) एडवोकेट चितले, विष्णु शुक्ला उर्फ़ बड़े भैया का सानिध्य मिला। तीन माह बाद फिर जबलपुर जेल आ गया। अब की बार, अलग बैरेक में सिवनी, छिंदवाडा, नरसिंहपुर के मीसाबंदियो के साथ। यहाँ हम लोगोंं ने अंतर बैरिक मीसा बंदी वॉलीबाल, कैरम, शतरंज जैसी प्रतियोगिता शुरू कार दी। व्यथित लोगोंं को व्यस्त रखने ‘’ हरे राम हरे, हरे कृष्णा ‘’ का 21 दिनों अखंड कीर्तन करवा दिया।

 

प्रत्येक जेल में जाकर, जेल के बहार तक पता और सम्पर्क सूत्र स्थापित करना ताकि अन्य जेल में मीसाबंदियो से और जेल के बाहर आंदोलन चला रहे नेताओं से (जेल प्रशासन की नजर बचाकर) सम्पर्क बनाये रखा जांये। ये सब मेरी जवाबदारी थी।

 

जेल से बाहर आते ही लोकसभा चुनाव की जबावदरियां मिली। जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर विधानसभा  चुनाव लड़ा। पार्टी के अंदर घात-प्रतिघात देखा। तीर-कमान चलते देखा। युवा मोर्चा के गठन में भूमिका निभाई।

 

युवा मोर्चा को युवा जनता और जनता युवा मोर्चा में टूटते देखा। जनता पार्टी को टूटते देखा। भाजपा को बनते देखा। राजनीति के मैदान में नेताओं के आशीर्वाद से अनेक जबावदारियो के निवर्हन का मोका मिला। अनेको संस्मरण और यादें है यहाँ अंत में बस एक चित्र का उल्लेख – जहाँ माननीय कुशाभाऊ ठाकरे और मैं दीप प्रज्ज्वलन कर रहे हे और माननीय नरेंद्र मोदी जी साथ खड़े है। प्रारब्ध और परिश्रम से आज मोदी जी आगे आगे और बहुत आगे खड़े है। हम सबके प्रेरणा स्त्रोत बनकर। देश की उम्मीदों के दीप स्तम्भ बन कर।

राजनीति के सागर में उठती मोदी लहर कर रही देश का विकास

राजनीति के सागर में उठी एक लहर जिसने किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया बल्कि नई -नई योजनाओं के मोती देकर जन मानस का कल्याण किया। जब-जब मोदी लहर उठी तब-तब विकास का एक नया मोती लाई। फिर चाहे यह मोती अटल पेंशन योजना का हो या प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना का।

यह वही अटल पेंशन योजना है जिसे प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता से उत्‍साहित देश की युवा पीढ़ी को ध्‍यान में रखकर तैयार किया। मुझे आज भी याद है जब मा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 2015 के बजट भाषण में कहा था, ‘दुखद है कि जब हमारी युवा पीढ़ी बूढ़ी होगी उसके पास भी कोई पेंशन नहीं होगी.’ यह योजना इसी कमी को दूर करने के लक्ष्‍य के साथ शुरू की गई। इससे ये सुनिश्चित होगा कि किसी भी भारतीय नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

असंगठित क्षेत्र के लोगों को पेंशन फायदों के दायरे में लाना इस बात को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय पेंशन योजना के तौर पर अटल पेंशन योजना एक जून 2015 से प्रभावी हो गई। इससे लोगों को हर महीने न्यूनतम भागीदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी।

अटल पेंशन योजना के पहले  9 मई 2015  को  प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के दो और सुनहरे मोती सभी के सामने आए

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में18 से 70 साल की उम्र के नागरिक की दुर्घटनावश मृत्‍यु या पूर्ण विकलांगता की स्‍थि‍ति में 2 लाख का कवर दिया जाता है और आंशि‍क विकलांगता की स्‍थि‍ति में 1 लाख का बीमा कवर है।

जब मोदी लहर उठ रही है, विकास का सूरज सातवे असमान पर चढ़ चुका है खुशियों की बारिश हो रही है ऐसे में जायज है इंद्रधनुष का दिखना।

इंद्रधनुष को प्रधानमंत्री जी का अटल जी जन्मदिन और क्रिसमस डे पर बच्चों को बहुत सुन्दर उपहार है। इस योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों में रोग-प्रतिरक्षण की प्रक्रिया को तेज गति देना है.इसमें 2020 तक बच्‍चों को सात बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए वैक्‍सनेशन की व्‍यवस्‍था की गई है। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने लॉन्‍च किया।

माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी और उनके नेतृत्व से आज भारत में जो विकास का कमल खिला है यदि उसके बारे में कुछ कहना जाऊं तो सूरज को दिया दिखाने जैसा होगा। आइए आज हम इस नमो दिवस पर संकल्प लें कि इस मोदी लहर से आ रहे सभी को भरपूर सदुपयोग कर देश को आगे बढाए।

    – अजय विश्नोई