अपनों की निकटता और प्रेम बसा है होली में

हमारे देश की परंपरा और संस्कृति, को अगर यहाँ मनाए जाने वाले त्योहारों का पर्याय कहा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा।

 

हिन्दू धर्म में दीपावली को रोशनी व धन धान्य का त्योहार माना जाता है वहीं होली को पूरे देश में रंगों, हर्ष उल्लास और एकता के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

 

इस त्यौहार की सबसे खूबसूरत बात मुझे यही लगती है कि इसे लोग सिर्फ अपने परिवार के साथ ना मना कर अपने मित्रों और सभी निकट संबंधियों सहित मानते हैं।

 

होली में धर्म, भेदभाव, गिले शिकवे भुला दिए जाते हैं और सभी गुझिया की मिठास और मनमोहक रंगों में डूब कर इसे मनाते हैं। इस त्यौहार में अपनों की निकटता और भरपूर प्रेम भरा होता है जो रंगों के रूप में सभी एक दूसरे पर बरसा देते हैं।

 

प्रति वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है, फाल्गुन शुरू होते ही होली की धूम चारों ओर दिखाई देने लगती है। खेतों में फसल पक चुकी होती हैं और किसान अपनी फ़सलों की खुशियाँ मनाते दिखाई देते हैं। चारों ओर बसंत की सुंदरता छाई रहती है।  

 

होली के त्यौहार का, पौराणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और जैविक महत्व भी है इस त्यौहार को मनाए जाने की अनेक विचारधाराएँ मिलती हैं।

होली का पौराणिक महत्व देखा जाए तो होलिका और प्रहलाद की कथा प्रचलित है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश देती है। राधा-कृष्ण की ब्रजधाम और बरसाने की होली प्रेम एवं मधुर संबंधो की सूचक है।

 

इसी प्रकार होली महोत्सव मनाने के पीछे लोगों की एक मजबूत सांस्कृतिक धारणा यह है कि जब लोग अपने घर के लिए खेतों से नई फसल लाते हैं तो अपनी खुशी और आनंद को व्यक्त करने के लिए होली का त्यौहार मनाते हैं।  

 

होली के त्यौहार का अपने आप में सामाजिक महत्व है, यह त्यौहार संबंधों को पुन: जीवित करने और मजबूती प्रदान करने का कार्य भी करता है, और एक दूसरे को महान भावनात्मक बंधन में बांधता है।

 

होली का त्यौहार अपने आप में स्वप्रमाणित जैविक महत्व रखता है। यह हमारे शरीर और मन पर बहुत लाभकारी प्रभाव डालता है और शिथिल पड़े शरीर को नई स्फूर्ति से भर देता है और मन, खुशियों से।

 

होली का त्यौहार एक तरह से हम सब को, जीवन को एक नई तरह से देखने की प्रेरणा देता है। देखिये ना होली में कितने प्रकार के रंगों का प्रयोग किया जाता है और जब हम सब उन रंगों से होली खेलते हैं, रंग गुलाल उड़ाते हैं तो सभी रंग एक होकर, अलग ही रंग बना लेते हैं। ऐसे ही जीवन में शामिल अलग-अलग रंगों रूपी निकट संबंधी और मित्रों से जब मिले तो एक हो जाएँ और होली के पकवानों की तरह नमकीन और मीठे रिश्ते जोड़े।

 

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपका अपना- अजय विश्नोई

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