क्या सही मायने मिले गणतंत्र को?

26 जनवरी 1950 का दिन हम भारतीयों के जीवन में, हमारी शान, मान-सम्मान, अधिकार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य ले कर आया था।

इस दिन हम भारतीयों को हमारा अपना संविधान मिला जो विश्व में सबसे विस्तृत संविधान है। इस संविधान के निर्माण में आदरणीय बाबा साहेब अम्बेडकर, प्रथम राष्ट्रपति माननीय डॉ। राजेंद्र प्रसाद और समस्त संविधान निर्माण समिति के सदस्यों की मेहनत और अथक प्रयासों के 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन लगे। 26 जनवरी को संविधान लागू होने के साथ ही हम भारतीय एक संसदीय प्रणाली की सरकार वाले, प्रभुसत्तासम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य का हिस्सा बने, जो हमारा हिन्दुस्तान है।

हमारा संविधान दुनिया के महानतम संविधानो में से एक हैं जो हमें आजादी देता अपना जीवन अपने अनुसार जीने और किसी भी धर्म, संस्कृति और समाज को पूरी स्वतंत्रता से अपनाने की जो 6 मूल अधिकारों में से एक है। मूल अधिकारों के साथ ही हमारा संविधान हमें कुछ महत्वपूर्ण कर्तव्यों का भी बोध कराता है जो हमारे राष्ट्र के प्रति हमारे प्रेम और सम्मान को व्यक्त करते हैं।
इन सब पहलुओं के अलावा एक और महत्वपूर्ण पहलू है लोकतांत्रिक राष्ट्र का जो लोकतंत्र को सही मायने देता है और अर्थ भी। और वह है- “जनता के द्वारा, जनता के लिए, जनता का प्रतिनिधि” और इन शब्दों में गणराज्य का सार मिलता है।

आज हम जिस भारत में रहते हैं वह आजाद भारत है और आजादी के लिए देश ने कितने ही वीरों और वीरांगनाओ को खोया है और यह स्वतंत्रता हमें हमारे वीर वलिदानियों के खून,पसीने के बल पर मिली है। फिर मिला संविधान जिसने अंग्रेजियत की पूर्णता विदाई कर दी और अपने देश के कानून और नियम प्रदान किये देशवासियों को।

संविधान ने आजाद भारत की जनता को, अपना प्रतिनिधि स्वयं चुनने या अपने चुने प्रतिनिधियों द्वारा देश के कार्यभार को संभालने के लिए सरकार चुनने का अधिकार दिया। संविधान द्वारा मिले अधिकारों के बाद भारतीय जनता लगातार मतदान का प्रयोग कर अपनी सरकार चुन रही है। 1950 के बाद कितनी सरकारें आई जो बहुमत या गठबंधन के आधार पर देश का कार्यभार संभालती रहीं। और कितनी ही बार पारिवारिक राजनैतिक पार्टियों का कार्यकाल रहा।

जनता द्वारा चुनी गयी कुछ सरकारों ने जनता पर आपातकाल लगाया, कुछ अपने परिवार को ही आगे बढाने में लगी रहीं और हमारे लोकतांत्रिक देश में सरकारें बनती बिगड़ती रहीं। धीरे धीरे चुनावों में मतदाता की रूचि कम होने लगी और मतदान का प्रतिशत गिरता गया।

फिर एक लहर चली २०१४ के लोकसभा चुनावों में और देश के इतिहास का सब्स्र लम्बा चलने वाला चुनाव लड़ा गया, सभी राजनितिक पार्टियों के बीच। चुनाव आयोग के अनुसार इस चुनाव में 814।5 मिलियन मतदाताओं ने मतदान किया। इस बार युवा मतदाताओं ने बढ़-चढ़ कर मतदान में हिस्सा लिया जो हमारे लोकतंत्र के लिए वरदान साबित हुआ और चुनाव नतीजो के बाद देश को एक ऐसी सरकार मिली जिसने भारतीय गणतंत्र के सही मायनों को परिपूर्ण किया। देश को पूर्ण बहुमत की व जनता की लोकप्रिय सरकार मिली और पूरे देश में राष्ट्र बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त देश की लहर दौड़ गयी।

जनता को जनता की सरकार मिली, और माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक महान नेतृत्व प्राप्त हुआ। मोदी जी अपने देश को अपना परिवार मन कर देश हित में कार्य करने का प्राण लिया और देश के लिए अपना निजी जीवन पीछे छोड़ आगे बाद गए।

देश को परिवारवाद से ऊपर उठ कर कार्य करने वाली सरकार मिली है जो निरंतर ऐसे संघन कार्यों में लगी हुई है जो सिर्फ और सिर्फ देशहित के लिए कार्य किये जा रहे हैं।
आज देश को सही मायने में लोकतांत्रिक और जनता की प्यारी सरकार मिली है जो पाने देश को अपना परिवार मान उसे व्यवस्थित, विकसित और सुसज्जित करने में लगी है।

सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Comments

comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *